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सकारात्मक दृष्टिकोण - 1 (पहला सबक)

नक्कारना (रद्द करना)

लेखक - पीटर शेफर्ड अनुवाद - गोपी कृष्ण बाली द्वारा

पहला सबक अपने आप को पाने के (जानने के) और पूर्ण (अखंड) करने के बारे में है. आप की पहचान के विखंडन या खन्डित होने में  - जो आपको लगता है या जो आप अपने बारे मॅ सोचतें है या महसूस करते है कि मैं ये हूँ  नक्कारा जाना एक प्रमुख कारक है. यह तब होता है जब दूसरॉ की टिप्पणियाँ या क्रियाओं द्वारा बनाई भावना या धारणा कि  'तुम गलत होको आप महसूस करते है. यह आप की शक्ति कम करता है,

जब आप किसी अन्य व्यक्ति द्वारा निर्देशित कार्य या उस की इच्छा के अनुसार, अपनी इच्छाओं का दमन कर, कार्य करते है, तब आप स्वयं की पहचान का एक भाग अन्य व्यक्ति के साथ जोड देते है, अपनी पहचान को दूसरों के अनुरूप ढाल लेते है. आप उन्हें गुरु बना अपने मन का स्वामित्व या उस पर राज़ करने देते हो. अब आप खंडित या विभाजित हो गए हो. यह मुख्यता दूसरों द्वारा नक्कारा जाने या अमान्य (रद्द) होने पर होता है. जब भी कोई यह कहता है कि " आप का प्रयास ठीक नहीं था पर्याप्त नहीं है" या ' आप को ऐसा नहीं करना चाहिए था तब आप के अन्दर एक प्रशन उठता है, अपने आप को विश्लेषण करने के लिए, और आप अपने आप से पूछते है "क्या मैं गलत हूँ या क्या मेरे साथ कुछ गलत है? "

जब अन्य व्यक्ति आप का गलत मूल्यांकन करता है या आप को या आपके मन:स्थिति को गलत समझता है, आप का परेशान होना या विचलित होना स्वाभाविक है. इस का मतलब है कि लोगों ने आप को नहीं समझा. तब आप का मनोबल और आपके उत्साह में कमी आ जाती है. आप इस गलत मूल्यांकन को - अन्य व्यक्ति के प्रभुत्व के या अधिकार के कारण स्वीकार कर सकते हैं. यदि आप अपने स्वयं के भावनाओं की और धारणाओं की उपेक्षा कर, अनदेखा कर, यह मान लेते है कि वह व्यक्ति सही होगा या है, आप अपना नहीं उन की इच्छा का, निर्देशों का पालन करने लगेगेंआप की पहचान का एक हिस्सा, आप के मूल रूप से विभाजित हो, खंडित होदूसरे व्यक्ति विशेष से जुड़ जाता है या प्रभावित हो जाता है. सही मायने में आप अपने मूल स्वरूप, जो आप के विकल्पों का जिम्मेदार है, अलग हो जाते है.

सामान्यता यह बहुत बच्चों में होता है जहां वे अपने माता पिता की विशेषताओं को अपनाते है , आपसी रिश्तों में या संबंधों में  भी बहुत बार देखा जाता है जहां अक्सर एक साथी दूसरे की अपेक्षाओं के साथ अपने आप को ढालता है, समायोजित कर देता है. और जाहिर है यह कार्यस्थल पर भी होता है. जब हमारा लक्ष्य अन्य व्यक्ति द्वारा दबा दिया जाता हैं अच्छी तरह से या अच्छे मतलब से  - यह अंततः हमारे जीवन को नष्ट करता है. दूसरों द्वारा नकारात्मक मूल्यांकन (व्यक्तिगत आलोचनाओं, या राय द्वारा), विशेष रूप से तनाव के समय में, हम को अत्यधिक परेशान कर सकता है.

हम हैरान है कि पता नहीं क्यों दुनिया की अधिकांश आबादीजो भौतिकवाद और अधिक गतिशील है, हताशा और अवसाद के जुए से पीड़ित हैंइस सब के लिए एक बड़ा प्रमुख कारण 'नक्कारा जाना या अमान्य होना' है. मनुष्य के रूप में हमे दोनों 'स्वतंत्र और अन्योन्याश्रित' होने की जरूरत है. हमे 'प्यार और योगदान की भावना' को महसूस करने की जरूरत है. यदि इन में से कोई भी गायब है तो या हम दुखी होते हैं, हार जाते है, या हम उदास होते हैं.

''स्टीव हेन' ने उनके लेख " नक्कारा जाने या अमान्य में भावनात्मक उत्पीड़न के सबसे विनाशकारी रूप हो सकता है [http://www.eqi.org/invalid.htm], में अमान्य के रूप वर्णन इस प्रकार किया है ...

रद्द करना अस्वीकार करने, उपेक्षा, नकली न्यायाधीश, तंग, नियंत्रण या कम किसी की भावनाओं को है. यह एक को कैसे नियंत्रण उन्हें लगता है और कब तक वे इसे महसूस करने का प्रयास है. लगातार रद्द करना सबसे महत्वपूर्ण कारण उच्च सहज भावनात्मक खुफिया के साथ एक व्यक्ति unmet भावनात्मक जरूरतों से जीवन में बाद में पीड़ित में से एक हो सकता है. एक संवेदनशील बच्चे को बार बार भ्रमित हो जाता है और अविश्वास को अपनी भावनाओं को अवैध शुरू हो जाती है. वह और उसकी भावनाओं का स्वस्थ उपयोग विश्वास विकसित करने में विफल रहता है. अपने विचारों और भावनाओं के बीच काम कर रिश्ता मुड़ जाता है. भावुक प्रक्रियाओं है कि उसके लिए एक बचाव के रूप में काम किया है जब एक बच्चे को शायद एक वयस्क के रूप में उसके खिलाफ काम करेंगे.

अमान्य (रद्द) होना, नक्कारा जानाआत्म- विश्वास को, रचनात्मकता को, व्यक्तित्व को मारता है ... और अगर हम व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जीवन को सशक्त करने का मार्ग नहीं ढूंढ़ते और मानवता के मानवता के साथ फिर से सम्बन्ध नहीं स्थापित करते, तो आज तक जो हमारे पास है, रेट के किले की तरह ढेह जाएगा.

हल है कि हम अपने जीवन में हमारे काम की तलाश में, और हमारी दुनिया में हमें बाहर झूठ नहीं है, लेकिन हमारे भीतर. हम एक को अपने दिल की शक्ति igniting द्वारा पिछले रद्द ले जाने के लिए हमारे मन को छूने और हमारे जीवन को बढ़ावा और सत्यापन और खुशी से दूसरों के जीवन शक्ति है.

इस सब का हल है...

कि जो हम अपने जीवन में, कार्य-स्थल पर और अपनी दुनियां में तलाश कर रहें है वह हल कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर हैपिछले जीवन को अमान्य धारणाओं से ऊपर उठने के लिए हम जागृत करें - अपनी हृदय की शक्ति से अपने मन को छूने की, जानने की शक्ति को, जो हम सब के पास है और हमारे जीवन को और दूसरों के जीवन को बढ़ावा दे कर सत्यापन और खुशी से भरपूर कर सकती है.

प्रयोग (प्रैक्टिकल) : अमान्य (रद्द) या नक्कारे जाने को कैसे संभालें
कई तरह से और विभिन्न तरीकों से दूसरों ने आप को दबा कर या कम प्रभावशाली बना कर रखा हो, या सहमत कराया हो सकता है, अब जरूरत है अपने आप को  फिर से देखने की कि तुम्हें क्या हुआ है? और अपने आप को पूछने की -

1. मैंने क्या विकल्प चुनें? विचार करें

•      मैंने अपने बारे में क्या तय किया?

•     मैंने  दूसरे व्यक्ति या अन्य लोगों के बारे में क्या तय किया?

•      मैंने क्या सोचने का चुनाव किया? ( कि मुझे क्या लगता है?)

•      मैं क्या महसूस करूँ मैंने कैसे चुना? मैंने कौन सी भावना को चुना?

•      मुझे क्या करना है? कौन से विकल्प को चुना?

•      कैसे मेरे विकल्पों ने मेरे व्यवहार को प्रभावित किया था या कर रहे हैं?

2.  क्या मैं दूसरे अन्य विकल्प चुन सकता था? और उन विकल्पों में से प्रत्येक का, मुझ पर, क्या प्रभाव हो सकता था?

3.  इस अनुभवों से क्या सकारात्मक सीखने को मिल सकता है?

सकारात्मक सीखना मूल रूप से वह जानकारी है जो एक दिशा चुनने पर आप को साकार हो सकती है. यह जानकारी अपने चुनाव को संशोधित कर (अगर तुम चाहते हो तो), बदली भी जा सकती है.

आप के पास हमेशा विकल्प होते है. अगर एक  डाकू आप को बंदूक दिखा कर धमकी देता है तो आप के पास उसे अपने बटुए को न देने  का विकल्प है. वह आप को मार भी सकता है या छोड़ कर भाग सकता हैपरन्तु आपके पास विकल्प थाआप ने उसे अपना बटुवा देने का चुनाव किया, जो बुद्धिमानी भरा हो सकता है, परन्तु आपको अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ भी नहीं करना यह आप हमेशा चुन सकते हो.

निम्नलिखित तरीकों की सूची में से किसी भी तरीके से आप को अतीत में अवैध  किया गया होगा, या शायद अब भी किया जा रहा हो. इन में से कोई भी सवाल जो  आप पर लागू होता है, ऊपर दी गई प्रक्रिया के माध्यम से जाने और देखें कि आप इस अनुभव से क्या सीख सकते हो अपने व्यक्तित्व का कौन सा हिस्सा पुन: स्थापित कर सकते हो.

•       क्या किसी ने कहा कि आपको अपनी राय को रखने का अधिकार नहीं है?

•      क्या किसी ने अन्यायपूर्वक आप की आलोचना की ?

•      क्या किसी ने आपके बारे में एक अनुचित सामान्यकरण (धारणा) बनाई है?

•      क्या किसी ने आपको तंग किया है?

•      क्या किसी ने आपको छोटा (बौना) महसूस कराया हैं?

•      क्या किसी ने आपको यह बताया है कि आपको वहाँ नहीं होना चाहिए?

•      क्या किसी ने आपको यह बताया कि आप इस बात से संबंधित नहीं है? या आपका कोई सम्बन्ध नहीं है?

•      क्या किसी ने आपको यह बताया है कि आप यह नहीं छोड़ सकते हो?

•      क्या किसी ने आपको अपने नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया है ?

•      क्या किसी ने आपके साथ समझौते में कोई चाल चली है?

•      क्या किसी ने आपको परखा है?

•      क्या किसी ने आपसे वह करवाया है जो आपको पसंद नहीं?

•      क्या किसी ने आपके लिए कुछ फैसला किया है?

•      क्या कोई आपकी चुनाव करने की क्षमता को छीन लेता हैं?

•      क्या किसी ने आपको नज़रंदाज़ किया है या आपका काम छीन लिया है?

एक उदाहरण  लेते है - शायद मेरी पत्नी कहती है कि "मैं  बेकार पति हूँ". मैं इस से अमान्य होता हूँ (नक्कारा जाता हूँ). और शायद मैं वो जो कहती है स्वीकार कर लेता हूँ. अब मैं किसी को प्यार नहीं करना चाहता. मैने यह मानने का चुनाव किया कि जो वह कहती थी वह सच है.
इसे फिर से खोज करने पर मैं यह देख सकता हूँ कि उसने सिर्फ शब्दों में वह बात कही थी और शायद यह बोलने के लिए अन्य कारण थे जैसे कि हमारे बीच में संवाद उस समय टूट गया था (हमारी बोलचाल बिलकुल बंद थी). मुझे अब पता लगा कि अमान्य ठहराना या नक्कारा जाना सिर्फ शब्दों के द्वारा भी हो सकता है हालाँकि उस के पीछे सम्भवत कोई ठोस मतलब (या भावना) न हो -आखिरकार इस से पहले उस ने कई बार यह भी कहा था कि मैं एक महान प्रेमी हूँ - पर यह एक बड़ी परेशानी का महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है. मैं ईमानदारी से और खुले वार्तालाप (संवाद) से ऐसी परेशानी को दूर या हल कर सकता हूँ. मेरे लिए यह एक सकारात्मक सीख है.

इरेने  बेकर (Irene Baker) CCTA (http://www.justcoachit.com),  को यह सबक लिखने में मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद.


अगला सबक  सह निर्भरता
(co-dependence) पर है.

~ सकारात्मक दृष्टिकोण ~
Positive Approach ~ सकारात्मक दृष्टिकोण ~

'सकारात्मक दृष्टिकोण' 30 पाठों में विभजित एक व्यक्तिगत विकास कोर्स है, जिसे परिवर्तनकारी मनोवैज्ञानिक पीटर शेफर्ड ने लिखा है. पाठ्यक्रम की मदद से आप अपनी पहचान के बारे में और अधिक स्पष्ट हो कर, जीवन में आप क्या चाहते हैं - आपका जीवन-लक्ष्य को पाने - और बेहतर जीवन के लिए अपने को होशपूर्वक बदलने के लिए तैयार होगे.

आप जानेगॅ कि कैसे आप की मान्यताओं से आपके जीवन के अनुभवॉ को आकार मिलता है और कैसे आप अपने जीवन की वास्तविकता को पैदा कर रहे हैं. इन पाठ मॅ दिये गये प्रत्येक व्यावहारिक तत्वों को आप जीवन मॅ हर सप्ताह के दौरान लागू कर सकते हैं और उन्हॅ जीवन मॅ शामिल कर, वास्तव में अपने जीवन को बेहतर बनाना शुरू कर सकते हैं और आप अपने जीवन-लक्ष्य दृष्टिकोण को प्रकट करने की ओर वास्तविक प्रगति करॅगॅ.



पाठ्यक्रम  विषय-सामग्री


अनुवादकर्ता - गोपी कृष्ण बाली ऑनलाइन पढ़ने के लिए 'सकारात्मक दृष्टिकोण' पाठ्यक्रम शीघ्र प्रकशित होगा ...

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